श्री जयशंकर प्रसाद की " अयोध्या का उद्धार "कविता पर कालिदास का प्रभाव
जयशंकर प्रसाद पर कालिदास का प्रभाव : "अयोध्या का उद्धार" के विशेष संदर्भ में हिंदी के मूर्धन्य कवियों में श्री जयशंकर प्रसाद का नाम अत्यधिक आदर के साथ लिया जाता है। वे छायावादी युग के प्रमुख कवि हैं... कालिदास का प्रभाव संस्कृत ग्रंथों में भी जयशंकर प्रसाद, कालिदास से विशेष प्रभावित दिखाई पड़ते हैं... अयोध्या का उद्धार : कथानक महाराज रामचंद्र के परमधाम पधारने के पश्चात् कुश को कुशावती... अथार्धरात्रे स्तिमितप्रदीपे शय्यागृहे सुप्तजने प्रबुद्धः। कुशः प्रवासस्थकलत्रवेषामदृष्टपूर्वा वनितामपश्यत।। रघुवंशम् 16/4 कुश और अयोध्या की अधिष्ठात्री देवी का संवाद कालिदास के अनुसार कुश ने उस स्त्री से पूछा—तुम कौन हो? तुम्हारे पति कौन हैं और मेरे पास किस उद्देश्य से आई हो? साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि रघुवंशी पराई स्त्री की ओर दृष्टि नहीं डालते। रघुवंश में यह प्रसंग इस प्रकार वर्णित है— का त्वं शुभे? कस्य परिग्रहो वा? किं वा मदभ्यागमकारणं ते? आचक्ष्व मत्वां वशिनां रघूणां मनः परस्त्रीविमुखप्रवृत्तिः॥ — रघुवंशम् 16.8 इसी प्रसंग का अनुसरण करते हुए जयशंकर प्रसाद...