मानसिक स्वास्थ्य का स्वरूप ( संस्कृत ग्रंथों के अनुसार )
सामान्यतया स्वारथ्य का तात्पर्य शारीरिक स्वस्थता से लिया जाता है। आजकल व्यक्ति इसी शारीरिक स्वास्थ्य को प्राप्त करने हेतु जागरूक एवं प्रयत्नशील दिखाई देते हैं किंतु मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा कर रहे है । प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी अत्यधिक महत्व प्रदान किया गया है । फलस्वरूप संस्कृत ग्रंथों के अनुसार शरीर और मन की स्वस्थता ही रवास्थ्य है। संस्कृत ग्रंथों की इस अवधारणा को आधुनिक चिकित्सा शास्त्री भी मानने लगे हैं । तदनुसार ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य की परिभाषा दी है - Health is the physical mental, and social wellbeing of man and not merely the absence of disease or infirmity. अतः मानसिक स्वारथ्य भी स्वास्थ्य सामान्य का ही अंग है । स्वास्थ्य की यह परिभाषा संस्कृत के अति प्राचीन ग्रंथ सुश्रुत संहिता में प्राप्त होती है- समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियः । प्रसन्नात्मेन्द्रिय मनाः स्वस्थ्य इत्यभिधीयते ।।...