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‘ राम नाम- जाप’ का महत्व और शास्त्रीय आधार

                   ‘ राम नाम- जाप’ का महत्व और शास्त्रीय आधार     श्री राम नाम के जाप पर अत्यधिक बल दिया गया  है । नाम जाप का क्या  महत्व है ? यह  जानना आवश्यक है ।इस राम  नाम जाप का अधिकारी कौन है? अर्थात् किसे नाम जप  करना चाहिए? उसका क्या प्रभाव होता है? और नाम जाप  का प्रयोजन क्या है ?साथ  ही नाम जाप का शास्त्रीय आधार और प्रमाण क्या है?  यह समझना पाठक और साधक, इन दोनों के लिए ही ज़रूरी है ।जिनका संक्षेप में वर्णन प्रस्तुत है -        नाम - जाप ( ईश्वर के नाम का स्मरण और जप ) का शास्त्रों में अत्यन्त महत्त्व बताया गया है। वेद , उपनिषद , पुराण और भक्ति - ग्रन्थों में इसके अनेक प्रमाण मिलते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख शास्त्रीय उल्लेख सरल रूप में प्रस्तुत हैं —   वेदों में नाम - स्मरण - वेदों में प्रत्यक्ष “ नाम - जप ” शब्द कम मिलता है , परन्तु ईश्वर - स्मरण और मन्त्र - जप का बहुत महत्व बताया गया है ।...

वैदिक विद्यापीठ एवं चरणों का स्वरुप

  वैदिक विद्यापीठ एवं चरणों का स्वरूप       पतंजलि के महाभाष्य से यह   स्पष्ट प्रतीत होता है कि उनसे पूर्व भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दीर्घ   अनवरत विकास एवं उन्नति हो चुकी थी। वैसे तो यह सर्वविदित ही है कि पतंजलि का   महाभाष्य अष्टाध्यायी का आकर ग्रंथ है ।अतः पतंजलि द्वारा वर्णित सामग्री के   स्रोत अनेक स्थानों पर पाणिनि ही है किंतु फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि पतंजलि कालीन भारत की राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक एवं धार्मिक दशा का ज्ञान पतंजलि के ग्रंथों से भली प्रकार हो सकता है ।तथा उन ग्रंथों के आधार पर ही   तत्कालीन शिक्षण पद्धति , साहित्य , शिक्षा संस्थाएं , अध्ययन के विषय एवं ग्रंथों के नाम इत्यादि ज्ञान प्राप्त होता है ।        प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गुरू शिष्य संबंध अत्यधिक पवित्र एवं महत्वपूर्ण स्थान रखता   है । वंश   का   तात् प र्य   जन्म   से   प्राप्त   वंश   के   अतिरिक़्त   विद्या   वंश   से   भी   था   । ...

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