वैदिक विद्यापीठ एवं चरणों का स्वरुप
वैदिक विद्यापीठ एवं चरणों का स्वरूप पतंजलि के महाभाष्य से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि उनसे पूर्व भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दीर्घ अनवरत विकास एवं उन्नति हो चुकी थी। वैसे तो यह सर्वविदित ही है कि पतंजलि का महाभाष्य अष्टाध्यायी का आकर ग्रंथ है ।अतः पतंजलि द्वारा वर्णित सामग्री के स्रोत अनेक स्थानों पर पाणिनि ही है किंतु फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि पतंजलि कालीन भारत की राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक एवं धार्मिक दशा का ज्ञान पतंजलि के ग्रंथों से भली प्रकार हो सकता है ।तथा उन ग्रंथों के आधार पर ही तत्कालीन शिक्षण पद्धति , साहित्य , शिक्षा संस्थाएं , अध्ययन के विषय एवं ग्रंथों के नाम इत्यादि ज्ञान प्राप्त होता है । प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गुरू शिष्य संबंध अत्यधिक पवित्र एवं महत्वपूर्ण स्थान रखता है । वंश का तात् प र्य जन्म से प्राप्त वंश के अतिरिक़्त विद्या वंश से भी था । ...