Posts

Showing posts from April, 2021

प्रो. कमलेशदत्त त्रिपाठी :व्यक्तित्व,कृतित्व और साहित्यिक अवदान

        साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत तथा विश्व विश्रुत कालिदास अकादमी (उज्जैन) के निदेशक के पद पर कार्यरत प्रो० कमलेश दत्त त्रिपाठी (1) देश विदेश में भारतीय विद्याविद और शास्त्रविद् के रूप में प्रख्यात है । अत्यधिक शान्त एवं सरल स्वभाव वाले त्रिपाठी जी के तीक्ष्ण ज्ञान चक्षु, पाण्डित्यपूर्ण लेखनी, तेजस्वी व्यक्तित्व का प्रभाव उनके कार्यों में स्पष्ट परिलक्षित होता है।अपनी उल्लेखनीय साहित्य साधना एवं अप्रतिम सर्जनात्मक प्रतिभा से प्रोफेसर त्रिपाठी ने संस्कृत को समृद्ध कर जो प्रतिमान स्थापित किये हैं, वह उल्लेखनीय है। धर्म, दर्शन और व्याकरण पर उनका पूर्ण अधिकार रहा है।नाटयशास्त्र एवं संस्कृत रंगमंच को उन्होने पुनर्जीवन प्रदान किया है। विदेशों में संस्कृत का प्रचार प्रसार करके,उसे विस्तृत फलक पर ले जाने वाले प्रोफेसर त्रिपाठी महान साहित्यकार एवं समीक्षक हैं ।      सौन्दर्य शास्त्र, नाटयशास्त्र एवं संस्कृत रंगमंच के क्षेत्र में,वे जीवन भर सक्रिय रहे । शास्त्र और प्रयोग दोनों में समान रूप से उनकी रूचि और गति रही है, शायद इसी कारण ...

वैदिक विद्यापीठ एवं चरणों का स्वरुप

  वैदिक विद्यापीठ एवं चरणों का स्वरूप       पतंजलि के महाभाष्य से यह   स्पष्ट प्रतीत होता है कि उनसे पूर्व भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दीर्घ   अनवरत विकास एवं उन्नति हो चुकी थी। वैसे तो यह सर्वविदित ही है कि पतंजलि का   महाभाष्य अष्टाध्यायी का आकर ग्रंथ है ।अतः पतंजलि द्वारा वर्णित सामग्री के   स्रोत अनेक स्थानों पर पाणिनि ही है किंतु फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि पतंजलि कालीन भारत की राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक एवं धार्मिक दशा का ज्ञान पतंजलि के ग्रंथों से भली प्रकार हो सकता है ।तथा उन ग्रंथों के आधार पर ही   तत्कालीन शिक्षण पद्धति , साहित्य , शिक्षा संस्थाएं , अध्ययन के विषय एवं ग्रंथों के नाम इत्यादि ज्ञान प्राप्त होता है ।        प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गुरू शिष्य संबंध अत्यधिक पवित्र एवं महत्वपूर्ण स्थान रखता   है । वंश   का   तात् प र्य   जन्म   से   प्राप्त   वंश   के   अतिरिक़्त   विद्या   वंश   से   भी   था   । ...

Popular posts from this blog

How Food Shapes the Mind: Insights from Chandogya & Brihadaranyaka Upanishads

कालिदास के 'मेघदूत' में 'काकोदुम्बर' का उल्लेख:साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि

कालिदास का कर्म सिद्धान्त: भारतीय दर्शन में कर्म का दार्शनिक विवेचन